हाँ जानता हूँ, आम से है बिल्कुल ये सारे । ना एहमियत ना कोई वजूद रह गया है इनका ।… Read more

मैं हर सेहेर वही होता हूँ । झील के किनारे धूप से परेशान उस बेंच को कुछ देर अपने जिस्म… Read more